UPPSC / UPSSSC · HINDI EDITION

पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी

पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता और जलवायु

प्रारंभिक संस्करण · अध्यायवार विस्तार जारी

पुस्तक परिचय

पर्यावरण अध्ययन में जीवों, उनके भौतिक परिवेश, ऊर्जा प्रवाह और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के संबंधों को समझा जाता है।

संस्करण: 05 नवम्बर 2026 · कवरेज: प्रारंभिक अध्याय प्रकाशित; पूर्ण पाठ्यक्रम होने का दावा नहीं।

विषय-सूची एवं अध्ययन क्रम

  1. पारिस्थितिकी तंत्र की मूल अवधारणा
  2. त्वरित पुनरावृत्ति
  3. अभ्यास प्रश्न
  4. स्रोत एवं आगे का अध्ययन

अध्याय 01 · पारिस्थितिकी तंत्र की मूल अवधारणा

अध्ययन उद्देश्य: मूल अवधारणाओं को समझना, प्रमुख शब्दों की पहचान करना और परीक्षा में पूछे जाने वाले तथ्यात्मक तथा अवधारणात्मक प्रश्नों का उत्तर देना।

1. पारिस्थितिकी तंत्र

पारिस्थितिकी तंत्र जीवों के समुदाय और उनके अजैविक पर्यावरण के बीच पारस्परिक क्रियाओं की कार्यात्मक इकाई है। इसके जैविक घटकों में उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक आते हैं। अजैविक घटकों में प्रकाश, जल, वायु, मिट्टी और तापमान शामिल हैं।

2. खाद्य श्रृंखला और जाल

खाद्य श्रृंखला में ऊर्जा एक पोषण स्तर से दूसरे स्तर तक जाती है। अनेक खाद्य श्रृंखलाएँ परस्पर जुड़कर खाद्य जाल बनाती हैं। ऊर्जा का प्रवाह सामान्यतः एक दिशा में होता है और प्रत्येक स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा कम होती जाती है।

3. जैव विविधता

जैव विविधता में आनुवंशिक, प्रजातीय और पारिस्थितिकी तंत्र स्तर की विविधता शामिल है। आवास विनाश, प्रदूषण, अति-दोहन, आक्रामक बाहरी प्रजातियाँ और जलवायु परिवर्तन इसके लिए प्रमुख खतरे हैं। संरक्षण के उपायों में राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र और समुदाय-आधारित संरक्षण शामिल हैं।

4. जलवायु परिवर्तन

ग्रीनहाउस गैसें पृथ्वी से निकलने वाले अवरक्त विकिरण के एक हिस्से को अवशोषित कर तापमान संतुलन को प्रभावित करती हैं। मानवीय गतिविधियों से इन गैसों की सांद्रता बढ़ने पर वैश्विक तापवृद्धि और जलवायु जोखिम बढ़ते हैं। शमन उत्सर्जन घटाने से और अनुकूलन प्रभावों के अनुरूप तैयारी से संबंधित है।

त्वरित पुनरावृत्ति

जैविक घटक: उत्पादक, उपभोक्ता, अपघटक | जैव विविधता: आनुवंशिक, प्रजातीय, पारिस्थितिकी तंत्र स्तर

पुनरावृत्ति करते समय परिभाषा, कारण/प्रक्रिया, उदाहरण और परीक्षा-उपयोगी तथ्य अलग-अलग नोट करें। जिन तथ्यों में समय के साथ बदलाव संभव है, उन्हें परीक्षा से पहले आधिकारिक स्रोत से पुनः जाँचें।

अभ्यास एवं स्व-मूल्यांकन

अध्याय पढ़ने के बाद बिना नोट्स देखे मुख्य अवधारणाएँ लिखें। फिर अपने उत्तर को अध्याय के तथ्यों से मिलाएँ।

नमूना प्रश्न: इस अध्याय का मुख्य अध्ययन-बिंदु क्या है?

उत्तर: पारिस्थितिकी तंत्र की मूल अवधारणा से संबंधित परिभाषाएँ, प्रमुख विशेषताएँ और उनके कारण/महत्व। अध्याय के तथ्यों को अपने शब्दों में समझाना अपेक्षित है।

पुनरावृत्ति प्रश्न: परीक्षा से पहले किन तथ्यों की जाँच करें?

उत्तर: स्थिर मूल अवधारणाएँ, प्रमुख उदाहरण और वे प्रशासनिक/समसामयिक तथ्य जिनमें बदलाव संभव है।

स्रोत एवं आगे का अध्ययन

यह अध्याय KAGZI द्वारा तैयार मौलिक व्याख्या है। तथ्य-जाँच के लिए विषयानुसार NCERT की आधिकारिक पाठ्यपुस्तकें, भारत सरकार के संबंधित मंत्रालय/विभाग, राज्य सरकार के आधिकारिक पोर्टल और परीक्षा आयोग की अधिसूचनाएँ प्राथमिक स्रोत मानें।

नोट: इस पुस्तक में किसी अनधिकृत कोचिंग पुस्तक या कॉपीराइटेड PDF की नकल नहीं की गई है। आधिकारिक PYQ का लेबल केवल सटीक परीक्षा-वर्ष और आधिकारिक प्रश्नपत्र स्रोत सत्यापित होने पर दिया जाएगा।